लद्दाख में बंगाल के पर्वतारोहियों ने चार चोटियों पर किया चढ़ाई

तीन नई चोटियों के नाम तेनजिंग, हिलेरी और नेताजी के नाम पर रखने का प्रस्ताव

रुद्र प्रसाद हलदर के नेतृत्व और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक सत्यरूप सिद्धांत के उपनेतृत्व में टीम ने नए रास्ते से चांग चेनमो कांगड़ी पर चढ़ाई की और तीन अछूती चोटियों पर पहली बार पहुंची

शब्दवाणी सम्माचार टीवी, शनिवार 17 अक्टूबर 2026, (प्रबंध सम्पादकीय श्री अशोक लालवानी 8803818844), कोलकाता। पश्चिम बंगाल के पर्वतारोहण क्लब सोनारपुर आरोही की टीम ने पूर्वी लद्दाख के चांग चेनमो क्षेत्र में चार पर्वत चोटियों पर सफल चढ़ाई की है। टीम ने 6,536 मीटर ऊंची चांग चेनमो कांगड़ी पर नए रास्ते से चढ़ाई की और तीन ऐसी चोटियों पर भी पहली बार पहुंची, जहां पहले कोई पर्वतारोही नहीं पहुंचा था। क्लब ने इन तीन चोटियों के नाम एडमंड हिलेरी, तेनजिंग नोर्गे और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर रखने का प्रस्ताव दिया है। 25 अगस्त को शुरू हुए इस अभियान के दौरान टीम को कड़ाके की ठंड, मुश्किल रास्तों, पानी की कमी और सामान पहुंचाने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद टीम ने चारों चोटियों पर चढ़ाई पूरी की। पर्वतारोहियों ने पहले से लगाई गई रस्सियों और ऊंचाई पर सामान ढोने वाले सहायकों की मदद के बिना यह अभियान पूरा किया। पूरी चढ़ाई अपने दम पर, पर्वतारोहण की अल्पाइन शैली में की गई। अभियान का नेतृत्व अनुभवी पर्वतारोही रुद्र प्रसाद हलदर ने किया, जबकि सत्यरूप सिद्धांत उपनेता रहे। हलदर माउंट एवरेस्ट, कंचनजंघा और इंद्रासन जैसी प्रमुख चोटियों पर चढ़ाई कर चुके हैं। उन्हें मुश्किल पहाड़ी इलाकों में नए रास्ते खोजने और पर्वतारोहण अभियानों का नेतृत्व करने का लंबा अनुभव है।

सत्यरूप सिद्धांत सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों यानी सेवन समिट्स और सात ज्वालामुखीय चोटियों यानी सेवन वोल्केनिक समिट्स पर चढ़ाई करने वाले पहले भारतीय हैं। वह इस उपलब्धि को हासिल करने वाले उस समय दुनिया के सबसे कम उम्र के व्यक्ति भी थे। वह माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर चुके हैं और 50 किलोग्राम वजन की स्लेज खींचते हुए दक्षिणी ध्रुव तक 111 किलोमीटर की स्की यात्रा भी पूरी कर चुके हैं। गुप्त पर्वत और मोंटो मैसिफ जैसी चोटियों पर पहली बार चढ़ाई करने के अलावा, माउंट ब्रम्माह और माउंट केन्या पर उनकी चढ़ाई भी खास उपलब्धियों में शामिल है। सत्यरूप सिद्धांत ने कहा इस अभियान में हमारी तकनीकी क्षमता, शारीरिक सहनशक्ति और टीम के रूप में काम करने की परीक्षा हुई। इतने दूर और मुश्किल इलाके में बिना पहले से लगाई गई रस्सियों के चढ़ाई करने के लिए अच्छी योजना और एक-दूसरे पर भरोसा जरूरी था। हर चोटी पर पहुंचना पूरी टीम की साझा उपलब्धि है। रुद्र प्रसाद हलदर ने कहा हमारा उद्देश्य मुश्किल पहाड़ी इलाकों में नए रास्ते खोजना और अपने दम पर चढ़ाई पूरी करना था। रास्ता बदलने, कड़ाके की ठंड और पानी की कमी जैसी परेशानियों के बावजूद टीम अपने लक्ष्य पर बनी रही। तीन नई चोटियों सहित चार चोटियों पर चढ़ाई करना सोनारपुर आरोही के लिए गर्व की बात है।”

टीम ने 11 सितंबर को नए रास्ते से चांग चेनमो कांगड़ी की चोटी पर चढ़ाई की। इसके अलावा, 9, 16 और 20 सितंबर को क्रमशः लगभग 6,400 मीटर, 6,420 मीटर और 6,274 मीटर ऊंची तीन अन्य चोटियों पर पहली बार सफल चढ़ाई की गई। अभियान के दौरान एक अन्य चोटी पर चढ़ने की कोशिश में आठ पर्वतारोहियों को मुश्किल हालात का सामना करना पड़ा। करीब 5,900 मीटर की ऊंचाई पर वे एक ग्लेशियर पर कई घंटों तक फंसे रहे। उस समय तापमान शून्य से लगभग 30 डिग्री सेल्सियस नीचे था। हालात का आकलन करने के बाद टीम ने आगे चढ़ाई नहीं करने का फैसला लिया और सभी सदस्य सुरक्षित कैंप-1 लौट आए। अभियान के मार्गदर्शक और सदस्य अनिंद्य मुखर्जी ने कहा, “पर्वतारोहण में धैर्य रखना, सही समय पर सही फैसला लेना और बदलते हालात के अनुसार खुद को ढालना जरूरी है। चांग चेनमो में आई मुश्किलों ने हमें टीमवर्क और अपने दम पर काम करने का महत्व समझाया। पूरी टीम के साथ इन चोटियों पर पहुंचना हम सभी के लिए यादगार अनुभव रहा।

सोनारपुर आरोही ने तीन नई चोटियों के नाम माउंट एडमंड हिलेरी, माउंट तेनजिंग नोर्गे और नेताजी सुभाष पर्वत रखने का प्रस्ताव दिया है। इन नामों के जरिए क्लब पर्वतारोही सर एडमंड हिलेरी, तेनजिंग नोर्गे और स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस को सम्मान देना चाहता है। क्लब को इन नामों के प्रस्ताव पर सर एडमंड हिलेरी के बेटे पीटर हिलेरी, तेनजिंग नोर्गे के बेटे जामलिंग तेनजिंग नोर्गे और नेताजी रिसर्च ब्यूरो के प्रतिनिधियों की सहमति मिल गई है। हालांकि, इन नामों को अभी आधिकारिक मंजूरी मिलना बाकी है। इस अभियान में दो महिला पर्वतारोही भी शामिल थीं। टीम में अनुभवी पर्वतारोहियों के साथ नए पर्वतारोही भी थे। नैतिक निलय नस्कर और देबाशीष मजूमदार ने नए रास्ते की खोज में अहम भूमिका निभाई। बिना शेरपा सहायकों की मदद के पूरा किया गया यह अभियान टीम की तैयारी, अनुभव और आत्मनिर्भरता को दिखाता है। चार चोटियों पर सफल चढ़ाई, तीन अछूती चोटियों पर पहली बार पहुंचने और चांग चेनमो कांगड़ी तक नया रास्ता खोजने के साथ सोनारपुर आरोही ने पूर्वी लद्दाख में पर्वतारोहण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

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